विधवा भाभी की चुदाई – hindi sex audio

मेरा नाम राज है। मेरी उमर इस समय 24 साल की है। शादी के 3 साल बाद ही एक रोड दुर्घटना में भैया का स्वर्गवास हो गया था। मैं भाभी के साथ अकेला ही रहता था। मेरी भाभी का नाम ॠतू है। हमारा अपना खुद का बिजनेस था। भैया के स्वर्गवास होने के बाद मैं ही बिजनेस की देखभाल करता था। भाभी बहुत ही खूबसूरत थी। वो मुझे राज कह कर ही बुलाती थी। पापा और मम्मी का स्वर्गवास बहुत पहले ही हो चुका था। मैं एक दम हट्टा कट्टा नौजवान था और बहुत ही ताकाटवर भी था। भाभी उमर में मुझसे 1 साल की छोटी थी। वो मुझे बहुत प्यार करती थी। भैया के गुजर जने के बाद मैं भाभी की पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थी। मैं सुबह 10 बजे ही घर से चला जाता था और फिर रात के 8 बजे ही घर वापस आता था।

ये उस समय की बात है जब भैया को गुजरे हुये 6 महीने ही हुये थे। एक दिन मेरी तबियत खराब हो गयी तो मैने मेनेजर से दुकान सम्भालने को कहा और दोपहर के 1 बजे ही घर वापस आ गया।

भाभी ने पूछा, क्या हुआ राज?

मैने कहा, मेरा सारा बदन दुख रहा है और लग रहा है की कुछ फ़ीवर भी है।
मेरी बात सुनकर वो परेशान हो गयी। उन्होने मुझसे कहा, तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चलो।

मैने कहा, मैने मेडीकल स्टोर से कुछ मेडीसीन ले ली है। मुझे थोड़ा आराम कर लेने दो।

वो बोली, ठीक है, तुम आराम करो। मैं तुम्हारे बदन पर तेल लगा कर मालिश कर देती हूं।

मैने कहा, नहीं, रहने दो, मैं ऐसे ही ठीक हूं।

वो बोली, चुप चाप अपने क्मरे में जा कर लेट जाओ। मैं अभी तेल ले कर आती हूं।

मैं कभी भी भाभी की बात से इन्कार नहीं करता था।

मैं अपने कमरे में आ गया। मैने अपनी शर्ट और पेन्ट उतार दी और केवल बनियान और नेकर पहने हुये ही लेट गया। मेरा नेकर एक दम ढीला था और थोड़ा छोटा नेकर ही पहनता था।

भाभी तेल ले कर आयी। उन्होने मेरे सिर पर तेल लगाया और मेरा सिर दबाने लगी। उसके बाद उन्होने मेरे हाथ, सीने और पीठ पर भी तेल लगा कर मालिश किया। आखिर में वो मेरे पैर पर तेल लगा कर मालिश करने लगी। आखिर मैं भी आदमी ही था। उनके हाथ लगने से मुझे जोश आने लगा। जोश के मारे मेरा लण्ड खड़ा होने लगा और मेरा नेकर तम्बू की तरह से उपर उठने लगा। धीरे धीरे मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया और मेरा नेकर एक दम तम्बू की तरह हो गया। मैं जानता था की नेकर के छोटा होने की वजह से भाभी को मेरा लण्ड थोड़ा सा दिखायी दे रहा होगा। वो मेरे पैरों की मालिश करते हुये मेरे लण्ड को भी देख रही थी और उनकी आंखे थोड़ा गुलाबी सी होने लगी थी। उनके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान भी थी। मालिश करने के बाद वो चली गयी। उसके बाद मैं सो गया।

शाम के 6 बजे मेरी नींद खुली और मैं उठ गया। भाभी चाय लेकर आयी। मैने चाय पी। उसके बाद मैं बाथरूम चला गया। बाथरूम से जब मैं वापस आया तो भाभी ने कहा, अब लेट जाओ, मैं तुम्हारे बदन की फिर से मालिश कर देती हूं।

मैने कहा, अब रहने दो ना, भाभी।

वो बोली, क्या मालिश करने से कुछ आराम नहीं मिला।

मैने कहा, बहुत आराम मिला है। वो बोली, फिर क्यों मना कर रहे हो।

मैने कहा, ठीक है, तुम केवल मेरे पैर की ही मालिश कर दो।

वो खुश हो गयी। उन्होने मेरे पैर की मालिश शुरु कर दी। मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। इस बार मेरा नेकर थोड़ा पीछे की तरफ़ खिसक गया था जिस से भाभी को मेरा लण्ड इस बार कुछ ज्यादा ही दिखायी दे रहा था। भाभी मेरे लण्ड को देखते हुये मेरे पैरों की मालिश करती रही। मुझे साफ़ पता चल रहा था कि मेरे लण्ड को देख कर वो भी जोश मे अने लगी थी।

थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं जब तेरे पैर की मालिश करती हूं तो तुझे क्या हो जाता है। मैं कहा, कुछ भी तो नहीं हुआ है मुझे। उन्होने मेरे लण्ड पर हलकी सी चपत लगते हुये कहा, फिर ये क्या है।

मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो मुझे गुदगुदी सी होने लगती है, इसी लिये तो मैं मना कर रहा था।

उन्होने जोश मे भर कर मेरे लण्ड पर फिर से चपत लगते हुये कहा, इसे काबू में रखा कर।

मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो ये मेरे काबू में नहीं रहता।

वो बोली, तुम भी अपने भैया की तरह ही हो। मैं जब उनके पैर की मालिश करती थी तो वो भी इसे काबू में नहीं रख पाते थे।

मैने मजाक करते हुये कहा, फिर वो क्या करते थे।

वो बोली, बदमाश कहीं का।

मैने कहा, बताओ ना भाभी, फिर वो क्या करते थे। भाभी शरमाते हुये बोली, वही जो सभी मर्द अपनी बीवी के साथ करते हैं।

मैने कहा, तब तो तुम्हें भैया के पैरों की मालिश नहीं करनी चाहिये थी। उन्होने पूछा, क्यों। मैने कहा, आखिर बाद में परेशानी भी तुम्हें ही उठानी पड़ती थी। वो बोली, परेशानी किस बात की, आखिर मेरा मन भी तो करता था।

मैने कहा, मेरा भी मन भी काबू में नहीं है, अब तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं।

वो बोली, शादी कर लो।

मैने कहा, मैं अभी शादी नहीं करना चाहता।

उन्होने मुस्कराते हुये कहा, फिर बाथरूम में जा कर मुठ मार लो।

मैने अनजान बनते हुये पूछा, वो क्या होता है।

वो बोली, क्या सच में तुझे नहीं मालूम है कि मुठ मारना किसे कहते हैं।

मैने कहा, नहीं।

उन्होने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये कहा, इसे अपने हाथ में पकड़ कर अपना हाथ तेजी से आगे पीछे करना। थोड़ी ही देर में इस में से ज्यूस निकल जायेगा और ये शान्त हो जायेगा।

मैने कहा, तुम मुझे थोड़ा सा कर के बता दो।
भाभी जोश में तो आ ही चुकी थी। वो बोली, तू बहुत ही बदमाश है। अपने लण्ड को बाहर निकाल, मैं बता देती हूं की कैसे करना है। मैने कहा, तुम खुद ही लण्ड को बाहर निकाल कर बताओ की कैसे करना है। उन्होने शरमाते हुये मेरे लण्ड को पकड़ कर नेकर से बाहर निकाल लिया। जैसे ही मेरा 9″ लम्बा लण्ड बाहर आया तो वो बोली, बाप रे, तेरा तो बहुत ही लम्बा है और मोटा भी।

मैने पूछा, अच्छा नहीं है क्या।

वो शरमाते हुये बोली, बहुत ही अच्छा है। मैने पूछा, भैया का कैसा था। वो बोली, उनका भी अच्छा था लेकिन तेरे जैसा लम्बा और मोटा नहीं था। मैने कहा, अब बताओ की कैसे करना है। उन्होने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपना हाथ आगे पीछे करना शुरु कर दिया। मुझे बहुत मज़ा आने लगा। वो भी जोश में आने लगी।

2 मिनट मुठ मारने के बाद वो बोली, ऐसे ही कर लेना। अब जा बाथरूम में।

मैने कहा, बाथरूम में क्यों, अगर मैं यहीं कर लेता हूं तो इसमें क्या बुरायी है।

वो बोली, तेरा ज्यूस यहां गिरेगा और मुझे ही साफ़ करना पड़ेगा।

मैने कहा, मैं ही साफ़ कर दूंगा। वो बोली, ठीक है, यहीं कर ले। मैं जाती हूं। मैने उनका हाथ पकड़ कर कहा, तुम यहीं बैठो ना। वो बोली, तेरे लण्ड पर हाथ लगने से मुझे पहले ही थोड़ा सा जोश आ चुका है। अगर मैं तुझे मुठ मारते हुये देखूंगी तो मुझे और ज्यादा जोश आ जायेगा। फिर मेरे लिये बरदाश्त करना मुश्किल हो जायेगा। आखिर मैं भी तो औरत हूं और अभी जवान भी हूं। मैने कहा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करुंगा। वो बोली, मुझे पूरा भरोसा है तभी तो मैने तेरे लण्ड को पकड़ कर तुझे मुठ मारना बताया है। मैने पूछा, नेकर उतार दू या ऐसे ही मुठ मार लू। वो बोली, क्या नेकर भी खराब करेगा। उतार दे इसे।

मैने अपना नेकर उतार दिया और मुठ मारने लगा। भाभी मुझे मुठ मारते हुये देखती रही। मैं भाभी को देखता हुआ मुठ मार रहा था। धीरे धीरे वो और ज्यादा जोश में आ गयी। जोश के मारे मेरे मुह से आह… ऊह… की आवाज़ निकाल रही थी। वो मुझे और कभी मेरे लण्ड को देख रही थी। उन्होने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया और सहलाने लगी। मैने पूछा, क्या हुआ। वो बोली, तू मुझे एक दम पागल कर देगा। मैं जा रही हूं।

मैने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, बैठो ना मेरे पास। वो चुप चाप बैठ गयी। मैं मुठ मारता रहा। भाभी जोश के मारे पागल सी हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में उन्होने मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली, अब रहने दे, अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा है।

मैने पूछा, क्या हुआ। उन्होने अपना पेटीकोट उपर कर दिया और बोली, देख मेरी चूत भी एक दम गीली हो गयी। तूने तो मुझे पागल सा कर दिया है। अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तू मेरी चूत को सहला दे, मैं तेरा लण्ड सहला देती हूं। मैने कहा, केवल सहलना ही है या कुछ और करना है। वो बोली, अगर तेरा मन करे तो मेरी चूत को थोड़ा सा चाट ले जिस से मुझे भी थोड़ा आराम मिल जायेगा। मैने कहा, कपड़े तो उतार दो। वो बोली, तू खुद ही उतार दे।

मैने भाभी के कपड़े उतार दीये। अब वो एक दम नंगी हो गयी। उनकी चूत एक दम साफ़ थी। मैने कहा, तुम्हारी चूत तो एक दम साफ़ है। वो बोली, मुझे चूत पर बाल बिलकुल भी पसन्द नहीं हैं इसी लिये मैं इसे हमेशा ही साफ़ रखती हूं। तेरा भी तो एक दम साफ़ है। मैने कहा, मुझे भी बाल पसन्द नहीं हैं। वो लेट गयी तो मैने उनकी चूत पर अपनी जीभ फिरानी शुरु कर दी। वो बोली, ऐसे नहीं। मैने कहा, फिर कैसे। वो बोली, मुझे भी तो तेरा चूसना है। तू मेरे उपर उल्टा लेट जा और अपना लण्ड मेरे मुह के पास कर दे फिर चाट मेरी चूत को।

मैं भाभी के उपर 69 की पोजीशन में लेट गया। मैने उनकी चूत पर जीभ फिरना शुरु किया तो उन्होने मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपने मुह में ले लिया और चूसने लगी। मुझे खूब मज़ा आने लगा। भाभी भी जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी। मैने उनकी चूत की दरार को अपने होंठो से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने जोर की सिसकारी ली।

मैने पूछा, क्या हुआ।

वो बोली, बहुत मज़ा आ रहा है, और जोर जोर से दबा।

मैने उनकी चूत की दरार को और ज्यादा जोर से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने मेरा लण्ड अपने मुह में और ज्यादा अन्दर ले लिया और तेजी के साथ चूसने लगी। मैने एक अंगुली उनकी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में भाभी की चूत से ज्यूस निकाल आया।

वो बोली, चाट ले इसे। मैने उनकी चूत का सारा ज्यूस चाट लिया। थोड़ी ही देर में मेरे लण्ड का ज्यूस भी निकालने लगा तो भाभी सारा का सारा ज्यूस निगल गयी। उसके बाद मैं हट गया और उनके बगल में लेट गया।

भाभी मेरा लण्ड सहलने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोली, आज तो वो हो गया जो कि नहीं होना चाहिये था।

मैने कहा, मैने ऐसा क्या कर दिया।

वो बोली, तूने मुझे अपना लण्ड दिखा कर आज मुझे पागल सा कर दिया।

मैने कहा, मैने तो नहीं दिखाया था।

वो बोली, तेरा नेकर ही इतना छोटा और ढीला था की मुझे तेरा लण्ड दिखायी दे गया। मैं अपने आप को काबू में नहीं रख पायी इसी लिये मैने तुझसे पैर की दोबारा मालिश करने के लिया कहा था। मैं तेरा लण्ड देखना चाह्ती थी क्यों की मुझे तेरा लण्ड बहुत ही लम्बा और मोटा दिख रहा था। मैने कहा, अब तो देख लिया ना। वो बोली, हा, देख भी लिया और पसन्द भी कर लिया। मैने कहा, अब क्या इरादा है।

वो बोली, तू भी वही कर जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।

मैने कहा, ये ठीक नहीं है। वो बोली, क्या ठीक है क्या नहीं, मैं कुछ नहीं जानती। अगर तू मेरे साथ नहीं करेगा तो मैं मर जाऊगी। मैने पूछा, मैं तुम्हारे साथ क्या करूं। वो बोली, जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।

मैने कहा, मैने तो कभी देखा ही नहीं की भैया तुम्हारे साथ क्या करते थे। भाभी ने मेरे गालो को जोर से काट लिया और बोली, अब चोद दे मुझे।

मैने कहा, दर्द होगा।

वो बोली, तो मैं क्या करूं, होने दे। जो होगा देखा जायेगा। मैने कहा, तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं। भाभी का तो जोश के मारे बुरा हाल था। वो बोली, तू मुझे नहीं चोदेगा लेकीन मैं तो तुझे चोद सकती हूं। मैने कहा, फिर तुम ही चोदो।

मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो चुका था। भाभी मेरे उपर आ गयी। उन्होने मेरे लण्ड के सुपाड़े को अपनी चूत के बीच रखा और दबाने लगी। उनके चेहरे पर दर्द की झलक साफ़ दीख रही थी फिर भी वो रुकी नहीं। मेरा लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत में घुसता ही जा रहा था। उनकी चूत बहुत ही टाईट थी। उन्होने दबाना जारी रखा तो थोड़ी ही देर में उनकी आंखो में आंसू भी आ गये। मैने पूछा, क्या हुआ। वो बोली, दर्द बहुत हो रहा है।

मैने कहा, फिर रुक जाओ ना, क्यों इतना दर्द बर्दाश्त कर रही हो। वो बोली, मैं पागल हो गयी हूं। अब तक मेरा लण्ड भाभी की चूत में 7″ तक घुस चुका था। दर्द के मारे भाभी का बुरा हाल हो रहा था। तभी वो अपने बदन का सारा जोर देते हुये अचनक मेरे लण्ड पर बैठ गयी। मेरा पूरा का पूरा लण्ड उनकी चूत में समा गया। उनके मुह से जोर की चीख निकाली। उनका सारा बदन थर थर कांपने लगा। उनके चेहरे पर पसीना आ गया। उनकी सांसे बहुत तेज चल रही थी।

वो मेरे उपर लेट गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी। मैं उनकी कमर और चूतड़ को सहलने लगा।

तभी मुझे बदमाशी सूझी। मैने उनकी गाण्ड के छेद पर अपनी अंगुली फिरानी शुरु कर दी तो उन्हें मज़ा आने लगा।

अचनक मैने अपनी अंगुली उनकी गाण्ड में डाल दी तो उन्होने जोर की सिसकारी ली और बोली, बदमाश कहीं का। पहले तो कह रहा था की तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं। अब मेरी गाण्ड में अंगुली डाल रहा है। क्या मैं अब तेरी भाभी नहीं रह गयी।

मैने कहा, बिलकुल नहीं, अब तो तुमने मेरा लण्ड तुमने अपनी चूत में डाल लिया है। अब तुम मेरी भाभी नहीं रह गयी हो। वो बोली, फिर मैं अब तेरी क्या लगती हूं। मैने कहा, बीवी। वो बोली, फिर चोद दे ना अपनी बीवी को। क्यों तरसा रहा है मुझे। अब तो मैने तेरा पूरा का पूरा लण्ड अपनी चूत के अन्दर ले लिया है। मेरी अंगुली अभी भी भाभी की गाण्ड में थी। मैने फिर शरारत की और कहा, मैं तुम्हें एक ही शर्त पर चोद सकाटा हूं।

वो बोली, कैसी शर्त।

मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड भी मारुंगा। वो बोली, अपनी बीवी से भी पूछना पड़ता है क्या। मैने कहा, मुझे नहीं मालूम।

वो बोली, तेरे भैया ने तो मुझसे कभी नहीं पूछा, जब भी उनका मन किया उन्होने मेरी चुदायी की और जब उनका मन हुआ तो उन्होने मेरी गाण्ड भी मारी। मैने कहा, इसका मतलब तुम भैया से गाण्ड भी मरवा चुकी हो। वो बोली, तो क्या हुआ, मज़ा तो दोनो में ही आता है। अब मुझे ज्यादा मत परेशान कर, चोद दे ना। मैने कहा, थोड़ा सा तुम चोदो फिर थोड़ा सा मैं चोदुंगा। वो बोली, ठीक है, बाबा।

भाभी ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये तो उनके मुह से चीख निकालने लगी।

मैने पूछा, अब क्या हुआ। वो बोली, दर्द हो रहा है। मैने पूछा, क्यों, अब तो पूरा अन्दर ले चुकी हो।

वो बोली, अन्दर लेने से क्या होता है। मेरी चूत अभी तेरे लण्ड के साईज की थोड़े ही हुयी है। मैने पूछा, मेरे लण्ड की साईज की कैसे होगी। वो बोली, जब तू मुझे कई बार चोद देगा तब। वो धीरे धीरे धक्के लगाती रही। मैने पूछा, तुम्हारी चूत को चौड़ा करने के लिये मुझे कितनी बार चोदना पड़ेगा। वो बोली, ये तो तेरे उपर है की तू किस तरह से मेरी चुदायी करता है। मैने पूछा, क्या एक बार में भी हो सकता है। वो बोली, बिलकुल हो सकता है, अगर तू मुझे पहली बार में ही कम से कम 1 घन्टे चोद सके तो। लेकीन मैं जनति हूं की तू ऐसा नहीं कर पयेगा। मैने पूछा, क्यों। वो बोली, तूने कभी किसी को पहले चोदा है। मैने कहा, नहीं। वो बोली, तो फिर तू 10 मिनट से ज्यादा रुकेगा ही नहीं। मैने कहा, रुकुनगा क्यों नहीं। वो बोली, तुझे मेरी चुदायी केरने में जोश ज्यादा आ जायेगा इस लिये।

भाभी को धक्के लगते हुये लगभग 10 मिनट हो चुके थे और वो इस दौरन 1 बार झड़ भी चुकी थी। तभी मेरे लण्ड का ज्यूस निकाल पदा और साथ ही साथ वो भी फिर से झड़ गयी।

वो मुस्कराते हुये बोली, क्या हुआ पहलवान। मैने कहा, वही हुआ जो तुम कह रही थी। वो बोली, मेरी चूत धीली करने के लिये तुझे कम से कम 1 घन्टे तक मेरी चुदायी करनी पदेगि। मैं ये भी जानती हूं की अगली बार तू ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट ही मुझे चोद पयेगा। इस तरह जब तू 3-4 बार मेरी चुदायी कर देगा तब कुल मिलकर 1 घन्टे हो जयेनगे और मेरी चूत ढीली हो जायेगी और तेरे लण्ड के साईज की हो जायेगी, समझ गये बच्चु। मैने कहा, बिलकुल समझ गया, मेडम।

भाभी ने मेरे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर ही रखा और मेरे उपर लेट गयी। वो मेरे होंठो को चूमती रही और मैं उनकी चूंचियो को मसलता रहा। 10 मिनट के बाद मेरा लण्ड उनकी चूत में ही फिर से खड़ा होने लगा तो वो बोली, अब तुम मुझे चोदो। मैने कहा, जैसी आप की मरजी। वो मुस्कराते हुये मेरे उपर से हट गयी और लेट गयी। मैं उनके उपर आ गया। मैने उनकी चुदायी शुरु कर दी। मैं पूरे जोश में था और जोर जोर के धक्के लगाते हुये उनको चोद रहा था।

वो बोली, शाबाश बहादुर, बहुत ही अच्छी तरह से चोद रहे हो, चोदते रहो, रुकना मत, थोड़ा और जोर के धक्के लगाओ। मैने और ज्यादा तेजी के साथ धक्के लगने शुरु कर दिये। लगभग 15 मिनट की चुदायी के बाद मैं झड़ गया। भाभी भी इस चुदायी के दौरान 2 बार झड़ चुकी थी।

मैने उन्हें सारी रात खूब जम कर चोदा। वो भी पूरी तरह से मस्त हो गयी थी और मैं भी। सुबह तक मैं उ्न्हे 6 बार चोद चुका था। सुबह को मैने पूछा, तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की साईज की हो गयी या नहीं।

वो बोली, जब तुमने मेरी 4 बार चुदायी कर दी फिर उसके बाद मैं चिल्लायी क्या। मैने कहा, बिलकुल नहीं। वो बोली, फिर समझ लो की मेरी चूत तुम्हारे लण्ड की साईज की हो गयी।

थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं एक बात तुमसे कहना चाहती हूं।

मैने पूछा, अब क्या है। वो बोली, मुझे तो तुम्हारा लण्ड बहुत पसन्द आ गया है। अगर तुम्हें मेरी चूत भी पसन्द आ गयी हो तो तुम मुझसे शादी कर लो। मैं तुमसे 1 साल छोटी भी हूं और जवन भी। मैं तुम्हें पूरा मज़ा दूंगी और एक दम खुश रखूगी। अगर तुम मुझसे शादी नहीं करोगे तो मैं तो तुम्हारी रखैल बन कर रह जाऊगी। जब तुम्हारी शादी हो जायेगी तो मुझे कौन चोदेगा। भाभी खूबसुरत थी ही। मैं उन्हें बहुत प्यार भी करता था और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी। उनकी बात सही भी थी क्यों की मुहल्ले के लोग बाद में उन्हें मेरी रखैल ही कहते।

मैने मजाक किया, अगर तुम मुझसे शादी करना चाहती हो तुम्हें एक काम करना पड़ेगा। वो बोली, मैं सब कुछ करने के लिये तैयार हूं। मैने कहा, तुमने उस पागल को देखा है ना जो हमारे मुहल्ले में घूमता रहता है। वो बोली, हां देखा है। मैने कहा, तुमने उसका लण्ड भी देखा होगा। वो बोली, देखा है। मैने पूछा, उसका लण्ड कैसा है। वो बोली, उसका तो तुमसे भी ज्यादा लम्बा और मोटा लगता है।

मैने कहा, मैं उसे एक दिन घर ले आता हूं, तुम उस से चुदवा लो।

वो बोली, ठीक है, ले आना। मैं तुमसे शादी करने के लिये कुछ भी कर सकती हूं। मैं उस पागल से भी चुदवा लूंगी।

मैने कहा, मैं तो मजाक कर रहा था।

वो बोली, तो क्या तुम समझी की मैं सच में ही उस पागल से चुदवा लूंगी।

मैने कहा, मैं तुमसे एक ही शर्त पर शादी करुंगा।

वो बोली, मैने कहा ना की मुझे तुम्हारी हर शर्त मनज़ूर है।

मैने कहा, सुन तो लो। वो बोली, फिर सुना ही दो। मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड मारुंगा तब ही तुमसे शादी करुंगा।

वो बोली, जब मैने तुम्हारा लण्ड अपनी चूत के अन्दर लिया तब ही मैं तुम्हारी बीवी बन गयी थी, भले ही हमारी शादी नहीं हुयी थी। अपनी बीवी से ये बात पूछी नहीं जाती। अभी मार लो मेरी गाण्ड।

मैने कहा, फिर सुहागरात के दिन मैं क्या करुंगा।

वो बोली, फिर रहने दो, सुहागरात के दिन तुम मेरी गाण्ड चोद लेना।

मैने कहा, एक दिक्कत और है।

वो बोली- अब क्या है।

मैने कहा, तुमसे शादी करने के बाद मैं सारी जिन्दगी किसी कुवांरी चूत को नहीं चोद पाऊगा।

वो बोली, मैं तुम्हारे लिये कुंवारी चूत का इनतजाम भी कर दूंगी। मैने पूछा, वो कैसे। वो बोली, ये मुझ पर छोड़ दो। मैने कहा, फिर मैं पण्डित से पूछ लेता हूं की हमें शादी कब करनी चाहिये। वो बोली, पूछ लेना। मैने पण्डित से बात की तो उसने 3 दिन बाद का मुहुरत बताया। 3 दिनो तक मैने ॠतू की खूब जम कर चुदायी की। अब उसे और ज्यादा मज़ा आने लगा था।

ॠतू चुदवाते समय मेरा पूरा साथ देती थी इस लिये मुझे भी खूब मज़ा आता था।

तीसरे दिन हम दोनो ने मन्दिर में शादी कर ली। रात में मैने ॠतू की गाण्ड मारी। वो बहुत चीखी और चिल्लायी लेकिन उसने एक बार भी मुझे रोका नहीं। उसकी गाण्ड कई जगह से कट फ़ट गयी थी और उसकी गाण्ड की हालत एक दम खराब हो गयी थी। वो 2 दिनो तक ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।

मैने पूछा, मैं जब तुम्हारी गाण्ड मार रहा था और तुम्हें इतनी ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं। वो बोली, मैं अपने पति को कैसे मना करती। आखिर बाद में मुझे भी तो गाण्ड मारवने में मज़ा आया। मैने कहा, वो तो आना ही था। अब मेरे लिये कुंवारी चूत का इनतेजाम कब करोगी। वो बोली, बस जल्दी ही हो जायेगा।

शादी के 4 दिन के बाद जब मैं दुकान से घर आया तो घर पर एक लडकी बरतन साफ़ कर रही थी। उसके कपड़े थोड़ा गन्दे थे लेकीन वो थी बहुत ही खूबसुरत। उसकी उमर लगभग 18 साल की रही होगी। मैं सीधा अपने कमारे में चला गया। ॠतू भी मेरे पीछे पीछे आ गयी।

मैने ॠतू से पूछा, ये कौन है। वो मुस्कराते हुये बोली, मैने इसे घर का काम करने के लिये रखा है। इसका नाम लाली है। पसन्द है ना तुम्हें। मैं इसे तुम्हारे काम के लिये भी जल्दी ही तैयार कर लू्ंगी। मैने कहा, तुम्हारी पसन्द का तो जवाब नहीं है। कहां रहती है ये।

ॠतू ने कहा, ये गावँ में रहती थी लेकिन अब यहीं रहेगी। मेरे भैया जब शादी में आये थे तो मैने उन से कहा था की मुझे घर का काम करने के लिये एक लड़की चाहिये। उन्होने ने ही इसे यहां पर भेजा है। ये हमारे साथ ही रहेगी। मैने कहा, जल्दी तैयार करो इसे। मैं इसे जल्दी से जल्दी चोदना चाहता हूं। वो बोली, थोड़ा सबर करो।

लाली बरतन साफ़ कर के कमारे में आ गयी। उसने ॠतू से पूछा, मालकिन, मैने घर का सारा काम कर दिया है, और कुछ करना हो तो बता दो। ॠतू ने कहा, तू तो मेरे गावँ की है, मुझे मालकिन मत कहा कर।

वो बोली, फिर मैं आप को क्या कह कर बुलाऊ। ॠतू ने कहा, तू मुझे दीदी कहा कर और इन्हें जीजू। वो खुश हो गयी और बोली, ठीक है, दीदी। ॠतू ने कहा, मेरी तबियत कुछ खराब रहती है इस लिये तू मेरे साथ ही सो जना। वो बोली, फिर जीजू कहन सोयेनगे। ॠतू ने कहा, वो भी मेरे पास ही सोयेनगे। वो बोली, फिर मैं आप के पास कैसे सो पौनगि। ॠतू ने कहा, मेरे एक तरफ़ तुम सो जाना दूसरी तरफ़ ये सो जायेगे। वो बोली, ये तो ठीक नहीं होगा।

ॠतू ने कहा, शहर में सब चलता है। यहां ज्यादा शरम नहीं की जाती।

वो बोली, ठीक है, मैं आप के पास ही सो जाऊगी।

हम सब ने खाना खाया उसके बाद मैं अपने कमरे में सोने के लिये आ गया। मैने केवल लुंगी ही पहन रखी थी। थोड़ी देर बाद ॠतू और लाली भी आ गये। ॠतू ने बरा और पेन्टी को छोड़ कर अपने बाकी के कपड़े उतार दिये। उसके बाद उसने मैक्सी पहन ली। ॠतू ने लाली से कहा, अब तू भी अपने कपड़े उतार दे। मैं तुझे भी एक मैक्सी देती हूं, उसे पहन लेना।

वो बोली, नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूं। ॠतू ने कहा, मैं जो कहती हूं, उसे मान लिया कर। सोते समय सारा बदन खुला छोड़ देना चाहिये। वो बोली, जीजू यहां हैं।

ॠतू ने कहा, जीजू से कैसी शरम, ये तुझे पकड़ थोड़े ही लेंगे। उतार दे अपने कपड़े। लाली ने शरमाते हुये अपनी शलवर और कमीज़ उतार दी। उसका बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूंचिया अभी बहुत ही छोटी छोटी थी। ॠतू ने उसे भी एक मैक्सी दे दी तो उसने वो मैक्सी पहन ली।

ॠतू मेरे बगल में लेट गयी। लाली ॠतू के बगल में लेट गयी। हम सब कुछ देर तक बातें करते रहे। उसके बाद सोने लगे। थोड़ी ही देर में लाली सो गयी तो ॠतू ने मुझसे कहा, अब तुम मेरी चुदायी करो।

मैने कहा, इसके सामने। वो बोली, मैं चाह्ती हूं की ये हम दोनो को देख ले, तभी तो मैं इसे तैयार करुंगी। तुम मुझे खूब जोर जोर से चोदना जिस से ये जाग जाये। मैने कहा, ठीक है।

मैने ॠतू को जोर जोर से चोदना शुरु कर दिया। सारा बेड जोर जोर से हिलने लगा। थोड़ी ही देर में लाली की नींद खुल गयी और वो उठ कर बैठ गयी। जैसे ही वो उठी तो मैने अपना लण्ड ॠतू की चूत से बाहर निकाल लिया। लाली ने जब हुम दोनो को देखा तो शरमा गयी। वो बोली, दीदी, मैं बाहर जा रही हूं। ॠतू ने कहा, क्यों, क्या हुआ। वो बोली, मुझे शरम आती है। ॠतू ने कहा, पागली, इसमें शरमाने की कौन सी बात है। तू अपना मुह दूसरी तरफ़ कर ले और सो जा। लाली उठ कर जाना चाहती थी लेकीन ॠतू ने उसका हाथ पकड़ लिया। लाली कुछ नहीं बोली।

वो ॠतू के बगल में ही लेट गयी लेकिन उसने अपना मुह दूसरी तरफ़ नहीं किया। ॠतू ने मुझसे कहा, अब तुम अपना काम जल्दी से पूरा करो, मुझे नींद आ रही है।

मैने ॠतू को चोदना शुरु कर दिया। लाली तिरछी निगाहों से हम दोनो के देख रही थी। 15 मिनट की चुदायी के बाद जब मैं झड़ गया तो मैने अपना लण्ड ॠतू की चूत से बाहर निकाला। ॠतू उठ कर बैठ गयी और उसने मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया। लाली ने शरम के मारे अपनी आखे बन्द कर ली। ॠतू ने अपना मुह लाली की तरफ़ कर लिया और अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया। उसने कहा, दीदी, अपना हाथ हटा लो। ॠतू ने कहा, मुझे तो ऐसे ही सोने की आदत है। अब सो जा। लाली कुछ नहीं बोली। उसके बाद हम सब सो गये।

सुबह हम सब उठ गये। लाली फ़्रेश होने चली गयी। ॠतू ने मुझसे कहा, अब तुम इसे बार बार अपना लण्ड दिखने की कोशिश करना लेकीन इसे हाथ मत लगाने देना। इसे ऐसा लगना चाहिये की जैसे तुम अपना लण्ड इसे दिखाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। मैने कहा, ठीक है। लाली फ़्रेश हो कर आ गयी।

ॠतू ने कहा, अब तू घर में झाड़ु लगा ले। वो झाड़ु लगाने चली गयी। ॠतू ने मुझसे कहा, अब तुम जा कर फ़्रेश हो जाओ। आज से अपना टावेल साथ मत ले जना और एक दम नंगे ही नहाना, मैं लाली से तुम्हारा टावेल भेज दूंगी। मैने कहा, ठीक है।

मैं बाथरूम में चला गया। फ़्रेश होने के बाद मैं एक दम नंगा ही नहाने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने ॠतु को पुकारा और कहा- तौलिया दे दो।

ॠतु ने लाली से कहा- जा, जीजू को तौलिया दे आ।

वो तौलिया लेकर आई तो मैंने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया। मेरा लण्ड पहले से खड़ा था। लाली की निगाह जैसे ही मेरे लण्ड पर पड़ी तो उसने अपना सिर नीचे कर लिया। वो मुझे तौलिया देने लगी तो मैंने कहा- थोड़ा रुक जाओ। मैं अपने सिर को जरा साबुन से साफ़ कर लूं।

मैंने अपने सिर पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। मैंने देखा की लाली तिरछी निगाहों से मेरे लण्ड को देख रही थी।

मैंने कुछ ज्यादा ही देर कर दी तो वो बोली- जीजू, तौलिया ले लो, मुझे और भी काम करना है।

मैंने कहा- थोड़ा रुक जाओ, मैं अपना सिर तो धो लूँ।

मैंने अपना सिर धोया और फिर अपने लण्ड पर साबुन लगाते हुये कहा- रात को तेरी दीदी ने इसे भी गन्दा कर दिया था, जरा इसे भी साफ़ कर लूँ। फिर मुझे तौलिया दे देना।

वो चुपचाप खड़ी रही। मैं अपने लण्ड पर साबुन लगाने लगा। वो अभी भी मेरे लण्ड को तिरछी निगाहों से देख रही थी। मैंने उससे मजाक करते हुये कहा- साली जी, तिरछी निगाहों से मुझे क्यों देख रही हो। अपना सिर ऊपर कर लो और ठीक से देख लो मुझे।

वो बोली- मुझे शरम आती है।

मैंने कहा- कैसी शरम? मैं तो तुम्हारा जीजू हूँ ना। बोलो, हूँ या नहीं।

वो बोली- हाँ, आप मेरे जीजू हैं।

मैंने अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा। मैंने अपने लण्ड पर लगे हुये साबुन को धोया और उसके हाथ से तौलिया लेटे हुए कहा- अब जाओ।

वो मुस्कराते हुये चली गई।

मैंने अपना बदन साफ़ किया और लुंगी पहन कर बाहर आ गया। लाली ड्राईंग रूम में झाड़ू लगा रही थी। मैंने ॠतु को पुकारा और कहा- जरा तेल तो लगा दो।

वो बोली- अभी आती हूँ।

ॠतु मेरे पास आ गई तो मैंने अपने लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- आज तेल नहीं लगाओगी क्या।

ॠतु समझ गई और बोली- लगाऊँगी क्यों नहीं।

उसने मेरे लण्ड पर तेल लगा कर मालिश करना शुरु कर दिया।लाली मेरे लण्ड को देखती रही। इस बार वो ज्यादा नहीं शरमा रही थी। तेल लगाने के बाद ॠतु जाने लगी तो मैंने कहा- तुम कुछ भूल रही हो।

ॠतु ने मेरे लण्ड को चूम लिया। उसके बाद मैंने नाश्ता किया और अपने कमरे में आ गया।

10 बजे मैं दुकान जाने लगा तो ॠतु ने कहा- लाली के लिये कुछ नये कपड़े और थोड़ा मेक-अप का सामान ले आना।

मैंने कहा- अच्छा, ले आऊँगा।

उसके बाद मैं दुकान चला गया। रात के 8 बजे मैं दुकान से वापस आया और मैंने लाली को पुकारा।

लाली आ गई और उसने मुस्कराते हुये कहा- क्या है, जीजू?

मैंने कहा- मैं तेरे लिये कपड़े ले आया हूँ और मेक-अप का सामान भी। देख जरा तुझे पसन्द है या नहीं।

उसने सारा सामान देखा तो खुश हो गई और बोली- बहुत ही अच्छा है।

मैंने पूछा- ॠतु कहाँ है?

वो बोली- फ़्रेश होने गई है।

मैंने कहा- जा, मेरे लिये चाय ले आ।

वो चाय लाने चली गई। मैंने अपने कपड़े उतार दिये और लुंगी पहन ली। वो चाय ले कर आई तो मैंने चाय पी। तभी ॠतु आ गई। उसने पूछा- लाली का सामान ले आये?

मैंने कहा- हाँ, ले आया और इसे दिखा भी दिया। इसे बहुत पसन्द भी आया।

मैं टीवी देखने लगा। ॠतु लाली के साथ खाना बनने चली गई। रात के 10 बजे हम सब ने खाना खाया और सोने चले गये। आज लाली बहुत खुश दिख रही थी। उसने आज जरा सा भी शरम नहीं की और खुद ही अपने कपड़े उतार दिये और मैक्सी पहन ली। हम सब बिस्तर पर लेट गये।

ॠतु ने मुझसे कहा- मुझे नींद आ रही है। तुम अपना काम कर लो और मुझे सोने दो।

मैं समझ गया। मैंने अपनी लुंगी उतार दी। ॠतु ने भी अपनी मैक्सी खोल दी और पैंटी उतार दी। लाली देख रही थी। आज वो कुछ बोल नहीं रही थी, केवल चुपचाप लेटी हुई थी। मैंने ॠतु को चोदना शुरु कर दिया। मैंने देखा कि लाली आज ध्यान से हम दोनों को देख रही थी।

15-20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया तो आज मैंने ॠतु की चूत को चाटना शुरु कर दिया। लाली ने मुझे ॠतु की चूत को चाटते हुये देखा उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख लिया। मैं समझ गया की अब वो धीरे धीरे रास्ते पर आ रही है। ॠतु की चूत को चाटने के बाद मैंने अपना लण्ड ॠतु के मुँह के पास कर दिया तो ॠतु ने भी मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया। उसके बाद मैं लेट गया।

तभी लाली ने कहा- दीदी, आप दोनों को घिन नहीं आती एक दूसरे का चाटते हुये?

ॠतु ने कहा- कैसी घिन, मुझे तो मज़ा आता है और तेरे जीजू को भी। उसके बाद हम सो गये।

सुबह मैं नहाने गया तो मैंने लाली को पुकारा और कहा- तौलिया ले आ।

वो बोली- अभी लाई, जीजू।

वो तौलिया लेकर आ गई। मैंने अपने लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- थोड़ा रुक जा, मैं इसे साफ़ कर लूं।

मैंने अपने लण्ड पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। आज लाली ने अपना सिर नीचे नहीं किया और मेरे लण्ड को ध्यान से देखती रही। वो अब ज्यादा नहीं शरमा रही थी। मैंने अपने लण्ड को साफ़ किया और फिर उससे तौलिया ले लिया। वो चली गई। मैं बाथरूम से बाहर आया तो ॠतु ने मेरे लण्ड पर तेल लगाया और फिर मेरे लण्ड को चूमा और किचन में चली गई। लाली इस दौरान मेरे लण्ड को ध्यान से देखती रही। मैंने नाश्ता किया और दुकान चला गया।

रात के 8 बजे मैं वापस आया तो मैं कुछ मिठाई ले आया था। मैंने लाली को पुकारा। लाली आ गई तो मैंने उसे मिठाई दे दी। उसने मिठाई ले ली और कहा- आपके लिये अभी ले आऊँ?

मैंने कहा- हाँ, थोड़ा सा ले आ। वो मिठाई ले कर आई तो मैं मिठाई खाने लगा। तभी ॠतु आई। उसने मुझे मिठाई खाते हुये देखा तो बोली- आज कल साली की बहुत सेवा हो रही है।

मैंने कहा- क्या करूं। मेरी तो कोई साली ही नहीं थी। अब जब मुझे एक साली मिल गई है तो उसकी सेवा तो करूंगा ही। लेकिन मेरी साली मेरा ज्यादा ख्याल ही नहीं रखती।

लाली बोली- जीजू, मेरी कोई बहन नहीं है इसलिये मेरा कोई जीजू तो आने वाला नहीं है। आप ही मेरे जीजू हो, आप हुकुम तो करो।

मैंने कहा- क्या तुम मेरा कहा मानोगी?

वो बोली- क्यों नहीं मानूंगी।

मैंने कहा- ठीक है, जब मुझे जरूरत होगी तो तुम्हें बता दूंगा।

अगले 2 दिनों में मैंने लाली से मजाक करना शुरु कर दिया। धीरे धीरे वो भी मुझसे मजाक करने लगी। अब वो मुझसे शरमाती नहीं थी। अब लाली खुद ही तौलिया ले आती थी। उस दिन भी जब मैं नहा रहा था तो वो तौलिया ले कर आई और खड़ी हो गई और मेरे लण्ड को देखने लगी।

मैंने कहा- साली जी, आज तुम ही मेरे लण्ड पर साबुन लगा दो।

वो बोली- क्या जीजू, मुझसे अपने लण्ड पर साबुन लगवाओगे?

मैंने कहा- तो क्या हुआ?

वो बोली- दीदी क्या कहेंगी?

मैंने ॠतु को पुकारा तो वो आ गई और बोली- क्या है?

मैंने कहा- मैं लाली से अपने लण्ड पर साबुन लगाने को कहा तो यह कह रही है कि दीदी क्या कहेंगी। अब तुम इसे बता दो कि तुम क्या कहोगी।

ॠतु ने कहा- मैं तो कहूँगी कि लाली तुम्हारे लण्ड पर साबुन लगा दे। आखिर वो तुम्हारी साली है। मैं भला इसे कैसे मना कर सकती हूँ।

मैंने लाली से कहा- देखा, यह तुम्हें कुछ भी नहीं कहेगी।

लाली ने कहा- फिर मैं साबुन लगा देती हूँ।

ॠतु चली गई। लाली ने थोड़ा सा शरमाते हुये मेरे लण्ड पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। मुझे खूब मज़ा आने लगा। उसकी आंखे भी गुलाबी सी होने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोली- अब बस करूं या और लगाना है।

मैंने कहा- थोड़ा और लगा दे, तेरे हाथ से साबुन लगवाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

वो साबुन लगाती रही। थोड़ी ही देर में जब मुझे लगा कि अब मेरा रस निकल जायेगा तो मैंने कहा- अब रहने दो।

उसने अपना हाथ साफ़ किया और चली गई।

मैं नहाने के बाद बाहर आया और ड्राईंग रूम में सोफ़े पर बैठ गया। मैंने ॠतु को पुकारा, ॠतु, जरा तेल तो लगा दो।

लाली मेरे पास आई और बोली- मैं ही लगा दूं क्या?

मैंने कहा- यह तो और अच्छी बात है। तुम ही लगा दो।

लाली मेरे लण्ड पर तेल लगा कर बड़े प्यार से मालिश करने लगी तो मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया। लाली ठीक मेरे लण्ड के सामाने जमीन पर बैठ थी। मेरे लण्ड से रस की धार निकल पड़ी और सीधे लाली के मुँह पर जाकर गिरने लगी।

लाली शरमा गई और बोली- क्या जीजू, तुमने मेरा मुँह गन्दा कर दिया।

मैंने कहा- तुम्हारे तेल लगाने से मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया और मेरे लण्ड का रस निकल गया। आओ मैं साफ़ कर देता हूँ।

वो बोली- रहने दो, मैं खुद ही साफ़ कर लूंगी।

लाली बाथरूम में चली गई। ॠतु किचन से मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। ॠतु ने कहा- अब तुम्हारा काम बनने ही वाला है।

नाश्ता करने के बाद मैं दुकान चला गया। रात को मैं लाली के लिये एक झुमकी ले आया। मैंने उसे झुमकी दी तो वो खुशी के उछल पड़ी और ॠतु को दिखाते हुये बोली- देखो दीदी, जीजू मेरे लिये क्या लाये हैं।

ॠतु ने कहा- तू ही उनकी एकलौती साली है। वो तेरे लिये नहीं लायेंगे तो और किसके लिये लायेंगे।

रात को खाना खाने के बाद हम सोने के लिये कमरे में आ गये। मैंने लाली से मजाक किया, क्यों लाली, मेरा लण्ड तुझे कैसा लगा।

उसने शरमाते हुये कहा- जीजू, यह भी कोई पूछने की बात है।

मैंने कहा- तेरी दीदी को तो बहुत पसन्द है, तुझे कैसा लगा।

उसने शरमाते हुये कहा- मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

मैंने पूछा- तुझे क्यों अच्छा लगा।

वो बोली- इस लिये कि आपका बहुत बड़ा है।

मैंने पूछा- जब मैं तुम्हारी दीदी के साथ करता हूँ तब कैसा लगता है?

वो बोली- तब तो और ज्यादा अच्छा लगता है। लेकिन जीजू, एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि तुम्हारा इतना बड़ा है फिर भी दीदी के अन्दर पूरा का पूरा घुस जता है।

मैंने कहा- तेरी दीदी को इसकी आदत पड़ गई है।

वो बोली- लेकिन पहली बार जब आपने घुसाया होगा तो दीदी दर्द के मारे बहुत चिल्लाई होगी?

मैंने कहा- दर्द तो पहली पहली बार सब औरतों को होता है। इसे भी हुआ था और यय खूब चिल्लाई भी थी। लेकिन लाली बाद में मज़ा भी तो खूब आता है। तुम चाहो तो अपनी दीदी से पूछ लो।

लाली ने ॠतु से पूछा- क्यों दीदी, क्या जीजू सही कह रहे हैं?

ॠतु ने कहा- हाँ लाली, तभी तो मैं इनसे रोज रोज करवाती हूँ। बिना करवाये मुझे नींद ही नहीं आती। तुम भी एक बार इनका अन्दर ले लो। कसम से इतना मज़ा आयेगा कि तुम भी रोज रोज करने को कहोगी।

लाली बोली- ना बाबा ना, मुझे बहुत दर्द होगा क्योंकि मेरा तो अभी बहुत छोटा है।

ॠतु ने कहा- छोटा तो सभी का होता है।

लाली बोली- मुझे दर्द भी तो बहुत होगा।

ॠतु ने कहा- पगली, एक बार ही तो दर्द होगा उसके बाद इतना मज़ा आयेगा कि तू सारा दर्द भूल जायेगी। तूने देखा है ना कि कैसे इनका मेरी चूत में सटासट अन्दर बाहर होता है।

वो बोली- हाँ, देखा तो है।

ॠतु बोली- फिर एक बार तू भी अन्दर ले कर देख ले। अगर तुझे मज़ा नहीं आयेगा तो फिर कभी मत करवाना।

वो बोली- बाद में करवा लूंगी।

ॠतु ने कहा- आज क्यों नहीं।

वो बोली- मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ।

ॠतु ने कहा- तो फिर आज तू इसे मुँह में ले कर चूस ले। जब तेरा मन कहेगा तभी इसे अन्दर लेना।

वो बोली- ठीक है, मैं मुँह में लेकर चूस लेती हूँ।

ॠतु ने मुझसे कहा- तुम लाली के बगल में आ जाओ।

मैं लाली के बगल में आ गया। लाली ने मेरी लुंगी हटा दी और अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया। उसके हाथ लगाने से मेरा लण्ड फनफनता हुआ खड़ा हो गया। लाली उसे सहलाने लगी। मुझे मज़ा आने लगा, मैंने कहा- अब इसे मुँह में ले लो।

वो बोली- जरूर लूंगी, पहले थोड़ा सहलाने दो ना।

मैंने कहा- ठीक है।

थोड़ी देर तक सहलाने के बाद लाली उठ कर बैठ गई। उसने शरमाते हुये मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

ॠतु ने मुस्कराते हुये पूछा- क्यों लाली, कैसा लग रहा है?

वो बोली- दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है।

ॠतु ने कहा- मेरी बात मान जा और इसे अपनी चूत के अन्दर भी ले ले। फिर और ज्यादा अच्छा लगेगा।

वो बोली- बहुत दर्द होगा।

ॠतु ने कहा- तू इतना डरती क्यों है। मैं हूँ ना तेरे पास।

उसने कहा- अच्छा, मुझे पहले थोड़ी देर चूस लेने दो, फिर मैं भी अन्दर लेने की कोशिश करुंगी।

लाली मेरा लण्ड चूसती रही। मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पर रख दिया लेकिन वो कुछ नहीं बोली। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरु कर दिया तो वो सिसकारियां भरने लगी।

थोड़ी देर में ही उसकी चूत गीली हो गई तो मैंने पूछा- कैसा लगा?

वो बोली- बहुत अच्छा।

लाली अब तक पूरे जोश में आ चुकी थी। मैंने कहा- जब तू मेरा लण्ड अपनी चूत के अन्दर लेगी तो तुझे और ज्यादा अच्छा लगेगा।

वो बोली- ठीक है जीजू, घुसा दो, लेकिन बहुत धीरे धीरे घुसाना।

मैंने कहा- थोड़ा दर्द होगा, ज्यादा चिल्लाना मत।

वो बोली- मैं अपना मुँह बन्द रखने की कोशिश करुंगी।।

मैंने कहा- ठीक है, तू पहले अपने कपड़े उतार दे।

वो बोली- मैंने कपड़े ही कहाँ पहन रखे हैं।

मैंने उसकी ब्रा और पेण्टी की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- फिर ये क्या है?

वो बोली- क्या इसे भी उतारना पड़ेगा।

मैंने कहा- हाँ, तभी तो मज़ा आयेगा।

उसने कहा- ठीक है, उतार देती हूँ।

इतना कह कर लाली खड़ी हो गई और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये। ॠतु मुझे देख कर मुसकुराने लगी तो मैं भी मुसकुरा दिया। लाली बेड पर लेट गई तो मैं लाली के पैरों के बीच आ गया। मैंने उसके पैरों को एकदम दूर दूर फैला दिया। उसके बाद मैंने अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत पर रगड़ना शुरु कर दिया। वो जोश के मारे पागल सी होने लगी और जोर जोर की सिसकारियां भरते हुये बोली- जीजू, बहुत मज़ा आ रहा है, और जोर से रगड़ो।

मैंने और ज्यादा तेजी के साथ रगड़ना शुरु कर दिया तो 2-3 मिनट में ही लाली जोर जोर की सिसकारियां भरने लगी और झड़ गई।

लाली की चूत अब एकदम गीली हो चुकी थी इसलिये मैंने अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा। मैंने उसकी चूत के होंठ को फैला कर अपने लण्ड का सुपाड़ा बीच में रख दिया। उसके बाद जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो वो चीख उठी और बोली- जीजू, बहुत दर्द हो रहा है, बाहर निकाल लो।

मैंने कहा- बस थोड़ा सा बरदाश्त करो।

मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चुका था। मैंने फिर से थोड़ा सा जोर लगाया तो इस बार वो जोर जोर से चीखने लगी। उसने रोना शुरु कर दिया तो ॠतु ने उसे चुप करते हुये कहा- दर्द को बरदाश्त कर तभी तो तू मज़ा ले पायेगी।

वो बोली- बहुत तेज दर्द हो रहा है, दीदी।

ॠतु उसका सिर सहलाने लगी तो थोड़ी ही देर में वो शान्त हो गई।

मेरा लण्ड इस उसकी चूत में 2″ तक घुस चुका था। जब लाली चुप हो गई तो मैंने फिर से जोर लगाया तो मेरा लण्ड थोड़ा सा और घुस गया और उसकी सील मेरे लण्ड के रास्ते में आ गई। वो फिर से चीखने लगी और बोली- जीजू, बाहर निकल लो, मैं मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फट जायेगी।

मैंने उसकी चूचियों को मसलते हुये कहा- बस थोड़ा सा ही और है।

थोड़ी देर तक मैं उसकी चूचियों को मसलता रहा और उसे चूमता रहा तो वो शान्त हो गई। मुझे अब उसकी सील को फ़ाड़ना था।

मैंने लाली की कमर को जोर से पकड़ लिया पूरी ताकत के साथ बहुत ही जोर का धक्का मारा। उसकी चूत से खून निकलाने लगा। मेरा लण्ड उसकी सील को फ़ाड़ते हुये 4″ से थोड़ा ज्यादा अन्दर घुस गया। लाली इस बार कुछ ज्यादा ही जोर जोर से चिल्लाने लगी तो ॠतु ने उसे चुप करते हुये कहा- बस हो गया, अब रो मत। अब दर्द नहीं होगा, केवल मज़ा आयेगा।

वो बोली- क्या पूरा अन्दर घुस गया?

ॠतु ने कहा- अभी कहाँ, अभी तो आधा ही घुसा है।

वो बोली- जब जीजू बाकी का घुसायेंगे तो मुझे फिर से दर्द होगा।

ॠतु ने कहा- नहीं, अब दर्द नहीं होगा, अब तुझे मज़ा आयेगा।

लाली जब शान्त हो गई तो मैंने धीरे धीरे उसकी चुदाई शुरु कर दी। उसे अभी भी दर्द हो रहा था और वो आहें भर रही थी। उसकी चूत बहुत ही ज्यादा कसी थी इसलिये मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में अन्दर-बाहर नहीं हो पा रहा था। मैं उसे चोदता रहा तो वो कुछ देर बाद वो धीरे धीरे शान्त हो गई। अब उसे भी कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। उसने सिसकारियां भरनी शुरु कर दी। ॠतु ने पूछा- अब कैसा लग रहा है।

वो बोली- अब तो मज़ा आ रहा है।

ॠतु ने कहा- पूरा अन्दर घुस जाने दे तब तुझे और मज़ा आयेगा, यह तो अभी शुरुआत है।

मैंने उसे चोदना जारी रखा तो थोड़ी ही देर बाद उसने अपना चूतड़ भी उठाना शुरु कर दिया।

थोड़ी देर की चुदाई के बाद लाली झड़ गई। उसकी चूत और मेरा लण्ड अब एकदम गीला हो चुका था। मैंने अपनी स्पीड धीरे धीरे बढ़ानी शुरू कर दी। लाली पूरे जोश में आ चुकी थी। वो जोर जोर से सिसकारियां भर रही थी। मैंने हर 4-6 धक्के के बाद एक धक्का थोड़ा जोर से लगाना शुरु कर दिया। इससे मेरा लण्ड थोड़ा थोड़ा कर के उसकी चूत में और ज्यादा गहराई तक घुसने लगा। जब मैं तेज धक्का लगा देता था तो लाली केवल एक आह सी भरती थी। वो इतने जोश में आ चुकी थी कि उसे अब ज्यादा दर्द महसूस नहीं हो रहा था। मैं इसी तरह से उसे चोदता रहा।

थोड़ी देर की चुदाई के बाद ही लाली फिर से झड़ गई। अब तक मेरा लण्ड उसकी चूत में 7″ अन्दर घुस चुका था। मैंने अपनी स्पीड बढाते हुये उसकी चुदाई जारी रखी। थोड़ी ही देर में मेरा पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में समा गया। ॠतु ने जब देखा कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस चुका है तो उसने लाली से कहा- इनका पूरा का पूरा लण्ड तेरी चूत के अन्दर घुस गया है। अब तुझे केवल मज़ा आयेगा।

वो बोली- मुझे विश्वास नहीं हो रहा है।

ॠतु ने कहा- अगर तुझे विशवास नहीं हो रहा है तो हाथ लगा कर देख ले।

लाली ने हाथ लगा कर देखा तो बोली- दीदी, यह पूरा अन्दर कैसे घुस गया? मुझे तो कुछ पता ही नहीं चला।

ॠतु ने कहा- जब तू थोड़ी देर की चुदाई के बाद पूरे जोश में आ गई थी तब ये बीच बीच में जोर का धक्का लगा देते थे। इससे इनका लण्ड थोड़ा थोड़ा कर के तेरी चूत के अन्दर घुसा जाता था। तू जोश में थी इस लिये तुझे कुछ पता ही नहीं चला।

मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी क्योंकि अब मैं झड़ने वाला था। 2 मिनट के अन्दर ही मैं झड़ गया तो लाली भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गई। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकल कर लाली से पूछा- चाटोगी?

उसने मेरा लण्ड देखा तो उस पर रस के साथ थोड़ा खून भी लगा हुआ था। वो बोली- जीजू, इस पर तो खून भी लगा हुआ है। मैं अगली बार चाट लूंगी।

ॠतु ने कहा- तेरी चूत का ही तो खून है और यह पहली पहली बार निकला है, चाट ले इसे।

वो बोली- तुम कहते हो तो मैं चाट लेटी हूँ।

उसने मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

ॠतु ने पूछा- चुदवाने में मज़ा आया?

वो बोली- हाँ, मज़ा तो आया लेकिन ज्यादा नहीं।

ॠतु ने पूछा- क्यों। वो बोली- जब मुझे ज्यादा मज़ा आना शुरु हुआ तो जीजू झड़ गये।

ॠतु ने कहा- अगली बार ज्यादा मज़ा आयेगा। इस बार तो इनका सारा समय तेरी चूत में रास्ता बनने में ही लग गया।

मैं लाली के बगल में लेट गया। वो मेरी पीठ को सहलाते हुये मुझे चूमती रही। 10 मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने लाली को डॉगी स्टाईल में कर दिया और उसकी चुदाई शुरु कर दी। उसे इस बार चुदवाने में ज्यादा मज़ा आया और मुझे भी। उसने इस बार पूरी मस्ती के साथ खूब जम कर चुदवाया। मैंने भी उसे पूरे जोश के साथ बहुत ही जोर जोर के धक्के लगाते हुये खूब जम कर चोदा। इस बार मैंने लगभग 35 मिनट तक उसकी चुदाई की। लाली इस दौरान 4 बार झड़ गई थी।

मैं लाली के बगल में लेट गया। हम सब आपस में बातें करते रहे। लगभग 1 घण्टे के बाद ॠतु ने मुझसे कहा- क्यों जी, तुम मुझे आज नहीं चोदोगे क्या। साली की कुंवारी चूत का मज़ा पाकर मुझे भूल गये क्या?

मैंने कहा- भला मैं तुम्हे कैसे भूल सकता हूँ, तुम तो मेरी बीवी हो। मैं रोज रोज घर का ही तो खाना खाता हूँ। कभी कभी होटल के खाने का मज़ा भी ले लेना चाहिये। तुम तो मेरे लिये घर का खाना हो और लाली होटल का। आज मैंने कुंवारी चूत का मज़ा लिया है इस लिये मैं तुम्हारी चूत को आज हाथ भी नहीं लगाऊगा। आज तो मैं तुम्हारी गाण्ड मारूंगा।

ॠतु बोली- फिर मारो ना।

लाली बोली- जीजू क्या कह रहे हो?

मैंने कहा- ठीक ही कह रहा हूँ। यह कभी कभी मुझसे गाण्ड भी मरवाती है। गाण्ड मरवाने में भी खूब मज़ा आता है। तुम भी मरवाओगी?

वो बोली- पहले आप दीदी की गाण्ड मार लो। जरा मैं भी तो देखूँ कि दीदी आपका इतना लमबा और मोटा लण्ड अपनी गाण्ड के अन्दर कैसे लेती है।

ॠतु घोड़ी बन गई तो मैंने ॠतु की गाण्ड मारनी शुरु कर दी। लाली आंखे फ़ाड़े मेरे लण्ड को ॠतु की गाण्ड में अन्दर बाहर होते हुये देखती रही। मैं 2 बार लाली की चुदाई कर चुका था इस लिये मैं जल्दी झड़ नहीं पा रहा था। ॠतु सिसकारियां भरते हुये मुझसे गाण्ड मरवा रही थी। लाली ॠतु को गाण्ड मरवाते हुये देख रही थी। उसकी आंखो में भी जोश की झलक साफ़ दिख रही थी। मैंने लाली से पूछा- कैसा लग रहा है।

वो बोली- बहुत ही अच्छा लग रहा है, जीजू।

मैंने पूछा- गाण्ड मरवाओगी?

वो बोली- फिर से दर्द होगा।

मैंने कहा- गाण्ड मरवाने में तो बहुत ही ज्यादा दर्द होता है।

वो बोली- ना बाबा ना, मैं गाण्ड नहीं मरवाऊँगी।

ॠतु ने कहा- लाली, पहले तू खूब जम कर इनसे चुदवाने का मज़ा ले ले। उसके बाद एक बार गाण्ड भी मरवाने का मज़ा भी ले लेना।

मैंने लगभग 45 मिनट तक ॠतु की गाण्ड मारी और झड़ गया।

मैंने कई दिनों तक लाली को खूब जम कर चोदा। उसे अब चुदवाने में बहुत मज़ा आने लगा था। मुझे भी कुंवारी चूत को चोदने का मज़ा मिल चुका था और मैं अब उसकी एकदम टाईट चूत को चोद रहा था। मैं लाली की गाण्ड भी मारना चहता था लेकिन उसे मैं खूब तड़पा तड़पा कर उसकी गाण्ड मारना चहता था। मैंने कई बार लाली के सामने ॠतु की गाण्ड मारी तो एक दिन वो अपने आप को रोक नहीं पाई। वो मुझसे कहने लगी- जीजू, एक बार मेरी भी गाण्ड मार लो, मैं भी गाण्ड मरवाने का मज़ा लेना चाहती हूँ।

मैंने कहा- तुझे बहुत ज्यादा तकलीफ़ होगी।

वो बोली- होने दो।

मैंने उससे कहा- तू नहीं जानती है कि मैंने ॠतु की गाण्ड पहली पहली बार कैसे मारी थी।

वो बोली- बताओगे तभी तो जानूंगी।

मैंने कहा- तो सुन, तूने वो पिल्लर देखा है ना जो आंगन में है।

वो बोली- हाँ, देखा है।

मैंने कहा- मैंने ॠतु को खड़ा करके उसी पिल्लर में कस कर बांध दिया था। उसके बाद मैंने इसके मुँह में कपड़ा ठूंस कर इसका मुँह भी बन्द कर दिया था जिससे यह ज्यादा चिल्ला ना सके। उसके बाद ही मैं ॠतु की गाण्ड मार पाया था। गाण्ड में लण्ड आसानी से नहीं घुसता है, बहुत मेहनत करनी पड़ती है और दर्द भी बहुत होता है। गाण्ड से बहुत ज्यादा खून भी निकलता है।

वो बोली- चाहे जो भी हो आप मेरी गाण्ड मार दो, मैं कुछ नहीं जानती।

मैंने कहा- तू कई दिनों तक बिस्तर पर से उठ भी नहीं पायेगी।

वो बोली- जब दीदी ने आप से गाण्ड मरवा लिया तो मैं क्यों नहीं मरवा सकती।

मैंने कहा- सोच ले, बहुत दर्द होगा। तेरी गाण्ड भी फट सकती है।

वो ज़िद करने लगी, मैं कुछ नहीं जानती, तुम मेरी गाण्ड मार दो बस।

मैंने कहा- अच्छा, कल मैं तेरी गाण्ड मार दूंगा।

वो बोली- नहीं आज ही और अभी मेरी गाण्ड मार दो।

ॠतु मेरी बात सुनकर मुस्कुरा रही थी। वो जानती थी कि मैं झूठ बोल रहा हूँ। वो यह भी समझ गई थी मैं उसकी गाण्ड को बहुत ही बुरी तरह से मारना चाहता हूँ।

ॠतु ने लाली से कहा- चल आंगन में। मैं ॠतु और लाली के साथ आंगन में आ गया। ॠतु कुछ कपड़े और रस्सी ले आई। उसके बाद मैंने लाली से कहा- तू पिल्लर को जोर से पकड़ कर खड़ी हो जा।

वो पिल्लर को पकड़ कर खड़ी हो गई। उसके बाद मैंने रस्सी से उसकी कमर को पिल्लर से बांध दिया। उसके बाद मैंने दूसरी रस्सी ली और उसके पैर को भी फैला कर पिल्लर से बांध दिया। फिर मैंने लाली के दोनों हाथ भी पिल्लर से बांध दिये।

वो बोली- जीजू, आपने तो मुझे ऐसे बांध दिया है कि मैं जरा सा भी इधर उधर नहीं हो सकती।

मैंने कहा- गाण्ड मारने के लिये ऐसे ही बांधना पड़ता है।

उसके बाद मैंने लाली के मुँह में कपड़ा ठूंस दिया और उसके मुँह को बांध दिया।

मैंने ॠतु से कहा- अब तुम मेरे लण्ड को थोड़ा सा चूस लो जिस से ये पूरी तरह से सख्त हो जाये।

ॠतु ने मेरे लण्ड को चूसना शुरु कर दिया तो थोड़ी ही देर में मेरा लण्ड पूरी तरह से लक्कड़ जैसा हो गया। मैंने ॠतु के मुँह से अपना लण्ड बाहर निकला और लाली के पीछे आ गया। मैंने लाली की गाण्ड के छेद पर अपने लण्ड का सुपाड़ा रखा और पूरे ताकत के साथ जोर का धक्का मारा। लाली दर्द के मारे तड़पने लगी। वो अपना सिर इधर उधर पटकने लगी। उसका मुँह बंधा हुआ था इसलिये उसके मुँह से केवल गूओ गूओ की आवाज़ ही निकल रही थी। एक धक्के में ही मेरा लण्ड उसकी गाण्ड को चीरता हुआ 2″ तक घुस गया। उसकी गाण्ड से खून निकल आया।

मैंने दूसरा धक्का लगाया तो लाली के मुँह से बहुत जोर जोर से गूऊ गूऊ की आवज़ निकलने लगी। मेरा लण्ड 4″ अन्दर घुस गया। लाली की गाण्ड से और ज्यादा तेजी के साथ खून निकलने लगा। मैंने फिर से एक धक्का मरा तो मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 5″ तक घुस गया। उसके बाद मैंने एक ही झटके से अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर खींच लिया। पुक की आवज़ के साथ मेरा लण्ड लाली की गाण्ड से बाहर आ गया। लाली के मुँह से अभी भी जोर जोर से गूओ गूओ की आवाज़ निकल रही थी।

मैंने ॠतु को अपना लण्ड दिखाते हुये कहा- इसकी गाण्ड तो बहुत ही तंग है। देखो कितना खून निकल आया है।

ॠतु बोली- क्यों तड़पाते हो बेचारी को। घुसा दो ना अपना पूरा लण्ड इसकी गाण्ड में। मैंने कहा- ठीक है बाबा, घुसा देता हूँ।

मैंने लाली की गाण्ड के छेद पर फिर से अपने लण्ड का सुपाड़ा रख दिया। उसकी गाण्ड खून से भीगी हुई थी। मैंने बहुत ही जोर का एक धक्का लगाया तो मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 5″ तक घुस गया। उसके बाद मैंने 2 धक्के और लगये तो मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 7″ तक अन्दर घुस गया। लाली का सारा बदन पसीने से भीग गया था। वो अपना सिर पिल्लर पर पटक रही थी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। मैं लाली की गाण्ड इसी तरह से मारना चाहता था। मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी।

ॠतु आंखे फ़ाड़े मुझे देख रही थी, उसने कहा- रहम करो इस बेचारी पर। क्यों तड़पा रहे हो इसे।

मैंने 2 बहुत ही जोरदार धक्के और लगाये तो मेरा पूरा का पूरा लण्ड लाली की गाण्ड में समा गया।

पूरा लण्ड घुसा देने के बाद भी मैं रुका नहीं, मैंने तेजी के साथ लाली की गाण्ड मारनी शुरु कर दी। लाली के मुँह से गूओ गूओ की आवाज़ निकल रही थी। उसकी गाण्ड बहुत ही ज्यादा टाईट थी इस लिये मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में आसानी से पूरा अन्दर बाहर नहीं हो पा रहा था। मैंने पूरे ताकत के साथ धक्के लगा रहा था। 10 मिनट के बाद मेरा लण्ड थोड़ा आसानी से अन्दर बाहर होने लगा। लाली के मुँह से भी ज्यादा आवाज़ नहीं निकल रही थी। मैंने लाली से पूछा- मुह खोल दूं।

उसने अपना सिर हाँ में हिला दिया।

मैंने पूछा- चिल्लओगी तो नहीं। उसने अपना सिर ना में हिला दिया।

मैंने लाली का मुँह खोल दिया और उसके मुँह से कपड़ा बाहर निकल लिया। वो रोते हुये बोली- जीजू, आपने तो मुझे मार ही डाला। क्या इसी तरह से गाण्ड मारी जाती है।

मैंने कहा- हाँ, गाण्ड इसी तरह से मारी जाती है। अगर मैंने तुम्हारा मुँह बांधा नहीं होता तो तुम कितनी जोर जोर से चिल्लाती, यह तुम अब समझ गई होगी।

वो बोली- आप सही कह रहे हो, तब तो मैं बहुत चिल्लाती।

मैंने कहा- अगर मैंने तुम्हें पिल्लर से ना बांधा होता तो अब तक कई बार अपना चूतड़ इधर उधर करती और मैं तुम्हारी गाण्ड में अपना लण्ड नहीं घुसा पाता।

वो बोली- जीजू, आप एकदम सही कह रहे हो। मैंने तो आप को धकेल ही दिया होता।

मैंने कहा- अब तुम ही बताओ मैंने सही किया या नहीं?

वो बोली- आपने बिलकुल ठीक किया। ऐसे ही करना चाहिये था। अब तो मुझे पिल्लर से खोल दो।

मैंने कहा- पहले मैं तुम्हारी गाण्ड तो मार लूं फिर खोल दूंगा।

वो बोली- तो मारो ना।

मैंने पूछा- कुछ मज़ा आ रहा है।

वो बोली- अभी तो बहुत ही कम मज़ा आ रहा है।

मैंने लाली की गाण्ड मारनी शुरु कर दी। मैं पूरे ताकत के साथ जोर जोर के धक्के लगा रहा था। लाली को भी अब मज़ा आ रहा था। उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी। 10 मिनट तक उसकी गाण्ड मारने के बाद मैं झड़ गया। मैंने अपना लण्ड लाली की गाण्ड से बाहर निकाला और लाली को दिखाते हुये कहा- देखो कितना खून निकला है तुम्हारी गाण्ड से।

वो आंखे फ़ाड़े मेरे लण्ड को देखने लगी, वो बोली- जीजू, अब तो खोल दो मुझे।

मैंने कहा- एक बार तुम्हारी गाण्ड और चोद लूं फिर खोल दूंगा।

वो बोली- कमरे में मार लेना।

मैंने कहा- तुम फिर से चिल्लओगी।

वो बोली- मैं अपना मुँह बंद रखने की कोशिश करुंगी।

मैंने ॠतु से कहा- खोल दो लाली को।

ॠतु ने लाली के हाथ पैर खोल दिये। लाली बाथरूम जाना चाहती थी लेकिन वो बिल्कुल भी चल फिर नहीं पा रही थी। ॠतु उसे सहारा देकर बाथरूम में ले गई। लाली ने अपनी गाण्ड और चूत को साबुन से साफ़ किया। फिर ॠतु उसे कमरे में ले आई। मैं कमरे में आया तो लाली बेड पर लेटी थी। मैं उसके बगल में लेट गया। 1 घन्टे के बाद मैंने फिर से लाली की गाण्ड मारनी शुरु की। वो थोड़ी देर तक चिल्लाई फिर शान्त हो गई। उसके बाद उसे खूब मज़ा आया और मुझे भी। उसने मुझसे खूब जम कर गाण्ड मरवाई।

धीरे धीरे 6 महीने गुजर गये। लाली मुझसे खूब जम कर चुदवाती रही और गाण्ड मरवाती रही। मुझे भी लाली की चुदाई करने में और उसकी गाण्ड मारने में खूब मज़ा आता था। एक दिन मैंने दुकान के नौकर रामू को कुछ फ़ाईल लाने के लिये घर भेजा। उसने घर पर लाली को देखा तो लाली उसे बहुत पसन्द आ गई। रामू की उमर भी 20 साल की थी और वो अभी कुंवारा ही था। उसने मुझसे लाली के बारे में पूछा तो मैंने उसे बता दिया कि वो ॠतु के गावँ की रहने वाली है।

उसने मुझसे कहा कि वो लाली से शादी करना चहता है।

मैंने कहा- ठीक है, मैं लाली से पूछ लूं फिर बता दूंगा।

रात में जब मैं घर आया तो मैंने लाली से बात की तो वो तैयार हो गई। उसे भी रामू पसन्द आ गया था।

उसने मुझसे कहा- जीजू, एक दिक्कत है।

मैंने पूछा- वो क्या?

वो बोली- आप मुझे बहुत ही अच्छी तरह से चोदते हैं और मेरी गाण्ड भी मारते हैं। अगर मैं शादी कर लूंगी तब मैं आप से मज़ा कैसे ले पाऊंगी?

मैंने कहा- पगली, तू अपनी दीदी से मिलने के बहाने आ जाया करना। मैं तेरी चुदाई कर दूंगा और तेरी गाण्ड भी मार दूंगा। सारी ज़िंदगी तू कुंवारी तो नहीं रही सकती।

वो बोली- फिर ठीक है।

मैंने लाली के माता पिता से बात की तो वो भी तैयार हो गये। कुछ दिनों के बाद लाली की शादी रामू से हो गई। रविवार को दुकान की छुट्टी रहती है। लाली हर रविवार के दिन ॠतु से मिलने आती है और मैं सारा दिन खूब जम कर उसकी चुदाई करता हूँ और उसकी गाण्ड भी मारता हूँ।

एक दिन जब मैं रात को दुकान से घर आया तो लाली घर पर आई हुई थी। उसके साथ एक औरत और थी। वो भी बहुत ही खूबसुरत थी लेकिन थी थोड़ी मोटी। उसकी उमर भी 20 साल के लगभग रही होगी।

मैंने लाली से कहा- आज तो रविवार नहीं है, फिर आज कैसे और यह तेरे साथ कौन है?

वो बोली- यह मीना है, मेरी भाभी। आपसे चुदवाने आई है।

मैंने कहा- तू क्या कह रही है?

वो बोली- जीजू, भोले मत बनो। आप इतनी अच्छी तरह से मेरी चुदाई करते हैं और मेरी गाण्ड मारते हैं, मैं क्या कभी भूल सकती हूँ। भाभी मेरे बारे में सब जानती हैं क्योंकि यह मेरी सहेली की तरह हैं और मैंने इन्हें सब कुछ बता दिया है। मैं इन से कुछ भी नहीं छुपाती हूँ। इनकी शादी हुये 3 साल गुजर गये हैं और यह अभी तक माँ नहीं बन पाई है। मैंने इनसे कह दिया था कि मैं तुझे अपने जीजू से चुदवा दूंगी। तुझे चुदाई का पूरा मज़ा भी मिल जायेगा और तू माँ भी बन जायेगी। यह तैयार हो गई। उसके बाद मैंने भैया से कहा कि भाभी को मेरे पास 1 महीने के लिये भेज दो। मैं इसका इलाज़ बहुत ही अच्छे दोस्तों से करा दूंगी। भैया ने इसे मेरे पास भेज दिया और मैं इसे आप के पास ले आई हूँ। अब आप इसका इलाज़ बहुत ही अच्छी तरही से कर दो। आप को फिर से एक कुंवारी चूत को चोदने का मौका मिल जयेगा।

मैंने कहा- यह कुंवारी थोड़े ही है।

लाली बोली- इसने मुझे बतया था कि भैया का लण्ड केवल 4″ का ही है और आपका लण्ड तो बहुत लम्बा और मोटा है। आपके लण्ड के लिये इसकी चूत कुवांरी जैसी ही है।

मैंने कहा- ठीक है मैं इसका इलाज़ कर दूंगा। लेकिन जैसे मैंने तेरी गाण्ड मारी थी ठीक उसी तरह मैं पहले इसकी गाण्ड मारुंगा।

उसके बाद ही मैं इसकी चूत को हाथ लगाऊँगा।

तभी मीना बोल पड़ी- जीजू, मुझे तो केवल माँ बनना है और आप से चुदवने का खूब मज़ा लेना है। आप जो भी चाहो मेरे साथ करो, बस मुझे माँ बना दो और मुझे चुदाई का पूरा मज़ा दे दो।मैंने लाली से कहा- जब मैं इसे चोद दूंगा तो इसकी चूत एकदम चौड़ी हो जायेगी। उसके बाद जब यह तेरे भैया से चुदवायेगी तो उनहेन इसकी चूत एकदम ढीली लगेगी तो वो क्या कहेंगे।

लाली बोली- वो कुछ भी नहीं कह पायेगे। मैं वही बहाना बना दूंगी जो मैंने रामू से से बनाया था।

मैंने पूछा- तूने रामू से क्या कहा था?

लाली बोली- जीजू, रामू को जब मेरी चूत चुदी हुई लगी थी तो मैंने रामू से कहा था की मेरी चूत में कुछ दिक्कत थी। डॉक्टर ने मेरी चूत में एक औजार डाला था जिस से मेरी चूत का मुँह एकदम चौड़ा हो गया।

मैंने कहा- तू तो बड़ी चालाक निकली।

लाली मुस्कुराने लगी।

मैंने लाली और ॠतु से कहा- तुम दोनों इसे भी आंगन में ले जाओ और पिल्लर से बांध दो।

लाली और ॠतु उसे लेकर आंगन में चले गये। थोड़ी देर बाद लाली मेरे पास आई और बोली- जीजू, आपका खाना तैयार है, चल कर खा लो।

मैं समझ गया कि लाली क्या कह रही है, मैंने कहा- चलो।

मैं लाली के साथ आंगन में आ गया। मैंने जैसे लाली की गाण्ड मारी थी ठीक उसी तरह उसकी भाभी की गाण्ड भी मारी। मुझे मीना की गाण्ड मरने में ज्यादा मज़ा आया क्योंकि मोटी होने की वजह से उसकी गाण्ड गद्देदार थी। उसे भी बहुत दर्द हुआ और उसकी गाण्ड से भी ढेर सारा खून निकला। उसके बाद लाली और ॠतु उसे कमरे में ले आये। मैंने सारी रात कमरे में ही खूब जम कर उसकी गाण्ड मारी। 2 बार जब मैं उसकी गाण्ड मार चुका तो उसके बाद उसे भी गाण्ड मरवाने में खूब मज़ा आने लगा।

दूसरे दिन से मैंने उसकी चुदाई शुरु की। उसकी चूत भी गद्देदार थी। पहली पहली बार वो बहुत चीखी और चिल्लाई लेकिन बाद में उसे खूब मज़ा आने लगा। मुझे उसकी चूत की चुदाई करने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आया। उसे भी मेरा लण्ड बहुत पसन्द आ गया। उसकी चूत मेरे लण्ड के लिये किसी कुंवारी चूत से कम नहीं थी। 1 महीने तक मैंने उसकी तरह तरह के स्टाईल में खूब जम कर चुदाई की और उसकी गाण्ड मारी। वो मुझसे अभी चुदवाना चाहती थी। उसने लाली से अपने मन की बात बता दी। लाली के भैया आये तो लाली ने उनसे कहा की अभी इलाज़ पूरा नहीं हुआ है। डॉक्टर ने 2 महीने और रुकने को कहा है। वो खुशी खुशी वापस गावँ चले गये।

15 दिनों के बाद जब मीना को महीना नहीं हुआ तो लाली और ॠतु उसे डॉक्टर के पास ले गये। डॉक्टर ने बताया कि वो माँ बनने वाली है। मीना बहुत खुश हो गई। उसने मुझे और ज्यादा जम कर चुदवाना शुरु कर दिया। मुझे मीना की गद्देदार चूत ज्यादा पसन्द आ गई थी इसालिये मैंने ज्यादातर उसके चूत की ही चुदाई की। मैंने अगले 1 1/2 महीने तक मीना को खूब जम कर चोदा और उसकी गाण्ड भी मारता रहा। उसके बाद वो गावँ चली गई। अब मैं केवल ॠतु और लाली को ही चोदता हूँ। ॠतु भी अब मां बनने वाली है।

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